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Life Problems And Discussion

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2020-10-02

बहुत प्रचलित वाक्य है ..कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है ऐसा क्यों है ?? !!nnआदमी आदमी का दुश्मन नही कहा जाता फिर औरतों के बारे में ऐसा क्यों कहा जाता है? ? nnइस विषय पर काफी सोचने के बाद.. मुझे लगा कि यह अस्तित्व की लड़ाई है ....औरतें ....जिनका अपना कोई अस्तित्व माना ही नही जाता.... अधिकतर.. वे अभी भी एक अच्छी बेटी.... एक अच्छी बहन .... फिर एक अच्छी पत्नी..nएक अच्छी बहू ...बनने के लिए प्रोत्साहित की जाती है ...उनको सम्मान तभी मिलता है जब वे परिवार के लोगो की कसौटी पर अच्छी साबित होती है... और खुद को अच्छी साबित करने के लिए ...वह अच्छी है दूसरो से ....यह बात लोग माने इसलिए.. उन्हे खुद को दूसरी अन्य महिलाओं से खुद को बेहतर साबित करना होता है फिर वह महिला चाहे उसकी बहू हो , भाभी हो, नन्द हो, जेठानी हो या देवरानी हो या अड़ोस- पड़ोस की कोई भी महिला हो और फिर शुरू हो जाता है खुद को उन सबसे बेहतर साबित करने के लिए दांव पेंच...... जिसमें दूसरी महिलाओ की बुराई करना ..बात बात पर नीचा दिखाना .....हर काम में नुक्स निकालना... किसी भी तरह की तरक्की या फायदे में यथासंभव अड़ंगे लगाना..... आदि आदि...n nयही कारण है कि खुद को परिवार में बेहतर बनाए रखने के लिए एक सास अपनी बहू को, नन्द अपनी भाभी को .... नीचा दिखाने की कोशिश में लगी रहती है ...हर समय एक द्वेष भावना बनी रहती ....जो धीरे-धीरे बढ़ती जाती है और यह होती है एक महिला का दूसरी महिला से दुश्मनी की शुरुआत और मुख्य कारण ।nnऔरतों का अगर स्वयं का अस्तित्व हों... समाज में पहचान हो तो शायद उनमें यह भावना थोड़ी कम हो जैसे कि आदमी स्वयं में इसीलिए संतुष्ट रहते है क्योंकि घर में, समाज में उन्हे सिर्फ आदमी होने के कारण ही बहुत से अधिकार... सम्मान मिल जाते है ...समाज में भी उनकी अपनी एक पहचान हैसियत होती है.. इसलिए उनके बीच फिर भी हेल्दी कॉम्पिटीशन होता है , पर अधिकतर औरतों की खुद की पहचान नही होती और हैसियत..... उनके पति या बेटे के आधार पर होती है ...या कहिये.. उनकी हैसियत पति या बेटे से मिलने वाले सम्मान और महत्व पर टिकी होती है .. परिवार में उनका महत्व भी इसी आधार पर होता है ....तो परिवार में अपनी हैसियत अपना महत्व बनाए रखने के लिए... उनकी नजरों में खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए भी वे परिवार की अन्य महिलाओ को नीचा दिखाने मे लगी रहती हैं..अगर वे खुद इस काबिल हो कि परिवार तथा समाज में खुद की योग्यता से अपनी हैसियत बना सके.. अपने को इस काबिल बना सकें ...कि किसी भी तरह से खुद को योग्य साबित कर सके (जिसकी छूट अभी भी सारी महिलाओ को नही मिली है) तो शायद उन्हे खुद को अच्छी और बेहतर साबित करने के लिए अन्य महिलाओं जो कि सास , बहू , भाभी, नन्द , बहन कोई भी हो सकती है की दुश्मन बनने की जरूरत ही न पड़े .....और फिर यह कहा जाने लगे कि महिला ही महिला की सबसे बड़ी शुभचिंतक होती है ....n©®reservednफोटो... साभार गूगल

2020-02-23

आपकी जान पहचान में भी कुछ ऐसे लोग जरूर होंगे जो बहुत कम बोलते होगे या सबसे बात करने से कतराते होंगे , ऐसे ही लोगों को अधिकतर घमंडी या नकचढ़ा मान लिया जाता है या देसी भाषा में खड़ूस भी कहा जाता है। nnलेकिन यह लोग घमंडी या चुप्पी साधे रहने वाले , दूसरों को कुछ ना समझने वाले , किसी को बात करने लायक ना समझने वाले नही बल्कि अंतर्मुखी स्वभाव के होते हैं। आजकल की बोलचाल की भाषा में कहा जाए तो इंट्रोवर्ट नेचर के होते हैं ।nnअंतर्मुखी स्वभाव के लोग जल्दी लोगों से घुलना-मिलना पसंद नहीं करते , ज्यादा लोगों के बीच बात करने से हिचकते हैं , जल्दी किसी से दोस्ती नही कर पाते पर जब किसी से दोस्ती करते हैं तो फिर हर संभव कोशिश करते हैं दोस्ती निभाने की ।nnकिसी मीटिंग या सभा में , सार्वजनिक समारोहों में ये लोग , अलग - थलग से रहते हैं । संकोची इतने होते हैं कि या तो अपनी बात कहते ही नही या बहुत ही कम शब्दों में कहते हैं । nnहां ..., एक बात और... इंट्रोवर्ट नेचर के लोग अपने काम पर ज्यादा फोकस रहते हैं ,और shy नेचर के यानी शर्मीले होते हैं इसलिए ज्यादा लोगों से अपनी तरफ से कम ही मेलजोल रखते हैं।nnतो यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं तो कोशिश कीजिए उनका स्वभाव समझने की , खुद अपनी तरफ से बात करने की क्योंकि ये घमंड या अकड़ नही , जन्म से मिला स्वभाव है ।nnPlease like and follow the page .

2020-02-19

आजकल अधिकांश लोग स्वार्थी रिश्तों से या तो परेशान हैं या खुद को रिश्तों के संबंध में ठगा हुआ महसूस करते हैं पर सच्चाई तो यह है कि ...

2020-01-27

जिस तरह सर्दी - जुखाम कोई बड़ी बीमारी नही होती लेकिन अगर लापरवाही की जाएं तो यह बढ़ कर निमोनिया भी हो सकती है जो स्वास्थ्य के लिए घातक होता है ।nnउसी तरह डिप्रेशन भी कोई बड़ी बीमारी नही होती ,किसी को भी डिप्रेशन हो सकता है, लेकिन यदि समय से इस पर ध्यान ना दिया जाए तो यह व्यक्ति के विचारों को कुंठित कर देता है , व्यक्ति हताश , निराश हो जाता है और समाज से परिवार से कटा - कटा सा रहने लगता है लोगों से बात करना लगभग बंद कर देता है ,हर परेशानी के लिए खुद को कोसने लगता है वगैरह-वगैरह ।nnकई बार डिप्रेशन बढ़ने पर व्यक्ति शारीरिक रूप से थका ,आलसी , लापरवाह या बीमार भी हो सकता है क्योंकि डिप्रेशन के कारण व्यक्ति अपने पर , अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना बंद कर देता है ।nnलेकिन यदि डिप्रेशन होने पर उसका समुचित इलाज किया जाए तो यह ठीक भी हो सकता है.... इसके लिए दवाएं आतीं हैं..... बिल्कुल सामान्य बीमारियों की तरह ।nnएक बात और ....n डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी क्योंकि बच्चे भी स्कूल में फ्रैंड्स, टीचर्स के व्यवहार ,घर में पैरेंट्स के व्यवहार n....जैसे हर बात पर डांट- फटकार, दूसरे बच्चों से तुलना करना, पढ़ाई के लिए बहुत ज्यादा प्रैशर डालना वगैरह कई कारण हैं जिनकी वजह से आजकल बच्चे भी डिप्रेस होने लगे हैं । nnबेहतर तो यह है कि डिप्रेशन की शुरुआत में ही डिप्रेशन किस कारण , समस्या की वजह से है यह पता लगाकर उसका समाधान ढूंढने की कोशिश की जाए, अपने परिवार के लोगों से ,परिचित लोगों से , फ्रैंड्स से प्रॉब्लम डिस्कस करें ।

2019-08-29

पन्द्रह दिन पहले ही उनकी शादी हुई थी, रीति-रिवाजों में व्यस्त होने की वजह से कहीं बाहर घूमने भी नही जा सके ।छुट्टियां भी ज्यादा नही मिल सकती थी इसलिए वह चारु के साथ इस महानगर में रहने आ गया था । नई -नई गृहस्थी थी तो उसे सजाने-संवारने में चारु बिजी हो गई और वह अपने प्रोजेक्ट्स में । nnशाम का समय था रवि और वह कॉफ़ी पी रहे थे... सामने टीवी पर डेली सोप चल रहा था ...... तभी चारू ने कहा ... " पुरूषों को तो अपनी पत्नियों की हिम्मत की दाद देनी चाहिए कि कैसे किसी इंसान से शादी होने के बाद उन आंख बंद कर भरोसा कर लेती हैं.... मुझे ही देखिए ..आपके साथ इस नए शहर में रहने चली आई , जबकि अभी हमारी शादी हुए दिन ही कितने हुए हैं और मैं आपको अभी ठीक से जानती भी नही फिर भी... कितना भरोसा है आप पर.. है ना ? " चारु ने रवि से इठलाते हुए कहा।nn" पर पत्नी से ज्यादा भरोसा तो पति करता है अपनी पत्नी पर....।"n "पत्नी से ज्यादा भरोसा...हो ही नही सकता ।"nn"कैसे नही हो सकता.. वह अपना पूरा घर ... बल्कि अपना पूरा जीवन ही पत्नी के हाथ में सौंप देता है... जैसे खाना खाते समय पति जानता ही नहीं कि वह जो खाना खा रहा है उसमें कहीं कुछ ऐसा तो पत्नी ने नही मिला दिया जिससे उसका जीवन ही खतरे में पड़ जाए ।"nn"रियली !" ऐसे तो कभी सोचा ही नही ।" चारु ने विस्मय से कहा ।

2019-08-21

कभी कुएं तालाब खुदवाना धार्मिक तथा पुण्य का काम माना जाता था पर अब सब आधुनिक हो गए तो ...

2019-08-01

"बहू ! तुम्हें एहसान मानना चाहिए मेरा कि मैने तुम्हे अपना बेटा दिया जिसकी वजह से तुम्हें कोई परेशानी नहीं है और तुम लाइफ एंज्वॉय कर पा रही हो " सरला ने तीखी नजरों से शुभि की तरफ देखते हुए तल्ख लहजे में कहा ।nn"नही मां ! एहसान तो हमें शुभि के पैरेंट्स का मानना चाहिए जिन्होंने हमें इतनी संस्कारशील, और समझदार बेटी दी है जिसकी वजह से आज मैं अपना सुखी पारिवारिक जीवन जी रहा हूं और अपने प्यारे से बच्चों का पापा भी हूं ।"

2019-07-11

"भाभी !ये चाभियां रख लीजिए , जब विशु आए तब उस को दे दीजिएगा।"n" लेकिन क्यों ...तुम कहां जा रही हो?"n" मम्मी के यहां ...।"n"कोई इमरजेंसी है क्या , तुम्हारी मम्मी ठीक तो हैं ना ?" रितु ने कुछ घबराहट के साथ पूछा ।nn"सब ठीक हैं ..।"n"फिर अचानक क्यों और अभी तो विशु भी नही आया अकेले क्यों जा रही हो...?" nएक साथ इतने सवाल उसने पूछ डाले पर शुभि ने कोई जवाब नहीं दिया ।उसने शुभि के चेहरे की तरफ देखा आंखें कुछ सूजी सी लग रहीं थीं ,ऐसा लगा मानो रोई हो। n n"एक कप चाय हो जाए ? वैसे भी मैं अपने लिए चाय बनाने ही जा रही थी ।"n"नही भाभी , ट्रेन छूट जाएगी।"n "बस पांच मिनट लगेंगे ।"nइतने प्यार और आग्रह से रितु ने कहा कि वह मना नही कर सकी । कुछ देर बाद वह दोनों चाय पी रहीं थीं चुपचाप ।n nचाय पीते-पीते उसने शुभि से बातचीत शुरू की तब पता चला कि विशु से उसका झगड़ा हुआ है । अभी एक साल भी नही हुआ दोनों की शादी को , दोनों सामने के फ्लैट में ही रहते है ,अकेले ...किसी का कोई दखल‌ नही ..फिर भी ...., वह शुभि को समझाने की कोशिश कर रही थी कि शुरू - शुरू थोड़े बहुत झगड़े मतभेद होते हैं , धीरे -धीरे दोनो एक दूसरे को समझने लगते है ।nपर वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी । nn"भाभी , मेरी भी सेल्फ रेस्पेक्ट ‌है , आज अगर मैंने चुपचाप बर्दाश्त कर लिया तो फिर विशु हमेशा ऐसा ही करेगा ।"n"अरे नही... कभी कभी सबको गुस्सा आ ही जाता है, इतनी सी बात पर घर छोड़कर जाना ठीक नहीं ।"nnतभी शुभि का मोबाइल बज उठा पर शुभि ने रिसीव करने के बजाय काट दिया । n रितु ने पूछा भी..." किसका है ..।"n"विशु का ....।"n"तो बात करो .."n"नही करनी....।"n" क्यों ..?"n"मैं अब मम्मी के घर पहुंचकर ही बात करूंगी ।"nnइस बीच चार - पांच बार विशु की कॉल आई और हर बार शुभि ने काट दी , पर इस बार रितु को फोन किया विशु ने, "भाभी ना जाने क्यों शुभि का फोन बार -बार कट रहा है, जरा बात करा दीजिए कुछ जरूरी बात है ।"n"शुभि यहीं है... लो बात कर लो.." कहते कहते रितु ने अपना मोबाइल शुभि की तरफ बढ़ाया। गुस्से में भी शुभि ने फोन ले लिया और बात खत्म होते-होते उसके चेहरे पर मुस्कराहट थी। n"भाभी, आज शाम को मैं और विशु मेरे फेवरेट हीरो की फिल्म देखने मल्टीप्लेक्स जा रहे है और खाना भी आज बाहर ही खाएंगे ।"nn"पर तुम तो अभी मम्मी के यहां जा रही हो ।"n"ओह भाभी!" कहकर वह रितु के गले लग गई और धीरे से कान में बोली... "बट आई लव हिम सो मच ।"nn"शुभि , मायके जाने के बजाय हर बार ऐसे ही समझदारी और प्यार से अपने झगड़े सुलझा लेना ।" प्यार से उसके गाल पर थपकी देते हुए रितु ने कहा।nnPl . like and follow the page .

2019-07-07

एक गांव के लोगों ने मिलकर 15 साल से सूखे पड़े तालाब की खुदाई कर के तालाब को फिर पहले जैसा कर दिया और जब तालाब पानी से भर गया तो जिस गांव में पानी का जलस्तर इतना नीचे चला गया था कि हैंडपंप से पानी भी निकलना मुश्किल हो गया था ।n उस गांव में जलस्तर तीस फुट पर आ गया और गांव के सारे कुएं पानी से लबालब भर गये क्योंकि जलस्तर तीस फुट पर आ गया था ।nnतालाब के फिर से जल से भरने के कारण आसपास काफी हरियाली हो गई और तालाब में मछली आदि जलीय जीव- जंतु भी काफी हो गए, अब तो मोर , सारस आदि स्थानीय पक्षियों के अलावा प्रवासी पक्षी भी यहां आने लगें ।nnइस सबके लिए गांव वालों और आसपास रहने वाले लोगों ने एक प्रबुद्ध दम्पत्ति से प्रेरणा पाकर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खुद ही तालाब की खुदाई की ।nnपूरा एक वर्ष लगा तालाब के सही होने में ।जब तालाब की खुदाई पूरी हो गई तो कुछ किमी की दूरी पर बह रही रामगंगा नहर से तालाब तक एक रजबहा भी खोदा जिससे तालाब में पानी आने लगा, फिर बारिश के मौसम में पानी बरसा तो वह भी इस तालाब में भरता गया इससे भूगर्भ जल स्तर काफी ऊपर आ गया और सूखे पड़े कुएं भी पानी से भर गए । nn यह तो सिर्फ एक उदाहरण है ,देश में कई जगहों पर सामान्य लोगों के,साथ- साथ इंजीनियरिंग कॉलेजों , से पढ़े युवा भी इस कार्य के लिए ना केवल लोगों को प्रेरित कर रहे हैं बल्कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस कार्य में स्वेच्छा से लगें हैं । nnदेश में ना जाने कितने तालाब सूखे पड़े हैं जिनकी वजह से जल स्तर नीचे और नीचे जा रहा है, अभी तो हैंडपंपों में पानी आना बंद हुआ है ,नदियों का जलस्तर इतना कम होने लगा है कि शहर में पानी की सप्लाई मुश्किल से होती है और सबमर्सिबल पंप के लिए भी काफी गहराई तक खुदाई करने पर जलस्तर मिलता है ।nn यह एक सच है कि जल है तो जीवन है, जिंदा रहने के लिए पानी पीने के अतिरिक्त सुबह नहाने, पूजा पाठ करने ,भोजन बनाने, अनाज , फल ,सब्जी उगाने आदि आदि हर काम के लिए पानी की आवश्यकता होती है और यह पानी ही अगर जलस्तर बहुत नीचा होते-होते लुप्त हो गया तब क्या होगा ??nnशायद इसीलिए अब पूरा समाज मिलकर जलस्रोतों को बचाने के काम में जुट गया हैं यह पहल निश्चित ही सराहनीय है।

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